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Id E Milad Essay In Hindi

मौलीद (मीलादुन नबी)

मलेशिया में सुन्नी मुसलिम मौलीद मनाते हुवे, शहर पुत्रजया, 2013 में.
अन्य नामईद अल-मौलीद अन-नबी (المولد النبوي), हावलिये, दोन्बा, गनी[1]
अनुयायीसुन्नी इस्लाम, शिया इस्लाम और इत्यादी मुस्लिम समुदायों में मनाया जाता है। वहाबी और सलफ़ी नहीं मनाते.
प्रकारइस्लामी संस्कृती - सांस्कृतिक
उद्देश्यह.मुहम्मद की जन्म तिथी
अनुष्ठानउपवास, जन उत्सव, धार्मिक गान, कुटुंब और सामाजिक सम्मेलन, घर और गलियों का अलंकरण
तिथि12 रबी अल-अव्वल (सुन्नी इस्लाम), 17 रबी अल-अव्वल (शिया इस्लाम) [2]
Frequencyवार्शिक

मीलाद उन-नबी इस्लाम धर्म के मानने वालों के कई वर्गों में एक प्रमुख त्यौहार है। इस शब्द का मूल मौलिद (Mawlid) है जिसका अर्थ अरबी में "जन्म" है। अरबी भाषा में 'मौलिद-उन-नबी' (مَولِد النَّبِي) का मतलब है हज़रत मुहम्मद का जन्म दिन है। यह त्यौहार 12 रबी अल-अव्वल को मनाया जाता है मीलाद उन नबी संसार का सबसे बड़ा जशन माना जाता है। 1588 में उस्मानिया साम्राज्य में यह त्यौहार का प्रचलन जन मानस में सर्वाधिल प्रचलित हुआ।[3]

नाम एवं ईद के अलग नाम[संपादित करें]

मवलिद का मूल अरबी भाशा का पद "वलद" है, जिस का अर्थ "जन्म देना", "गर्भ धारण" या "वारिस" (वंश) के हैं। [4] समकालीन उपयोग में, मवलीद या मौलीद या मौलूद, प्रेशित मुहम्मद के जन्मतिथी या जन्म दिन को कहा जाता है। [5]

मौलीद का अर्थ ह.मुहम्मद के जन्म दिन का भी है, और इस शुभ अवसर पर संकीर्तन पठन या गायन को भी "मौलीद" कहा जाता है, जिस में सीरत और नात पढी जाती हैं। .[6] इस पर्व को इन नामों से भी पुकारा और पहचाना जाता है:

  • ईद अल-मौलीद अन-नबी – मुहम्मद प्रवक्ता का जन्म दिन (अरबी)
  • ईद मीलाद-उन-नबी – ह.मुहम्मद की जन्म तिथी पर ईद (उर्दू)
  • ईद-ए-मीलादुन नबी – ह.मुहम्मद का जन्म (बंग्लादेशी, श्रीलंका, माल्दीव और दक्षिण भारत की भाशाओं में)
  • एल मूलेद (एन-नबवी)/मूलेद एन-नबी – जन्म/प्रेशित का जन्म (ईजिप्ट की अरबी भाशा)
  • एल-मूलेद - जन्म (तुनीश की अरबी भाशा)
  • गमोव – ? (वोलोफ़ भाशा)
  • मौलूद – प्रेषित का जन्म (अरबी)
  • मौलीद अन-नबी (ब.व. : अल-मवालिद) – प्रेषित का जन्म (अरबी)
  • मीलाद अन-नबी – पैगंबर का जन्म (उर्दू)
  • मौलीदुर-रसूल – अल्लाह के पैगंबर का जन्म (मलय भाशा)
  • मौलीदुर-नबी – प्रेषित का जन्म (इंडोनेशियन भाशा)
  • मौलूद नबी – प्रेशित का जन्म (मलेशियन भाशा)
  • मौलीदी – पैगंबर का जन्म (स्वाहिली और हौसा भाशाएं)
  • मौलूद-ए- शरीफ़ – शुभ जन्म (दारी भाशा (पर्शियन)/उर्दू)
  • मौलीद एन-नबोई एशरीफ़ – प्रेशित का शुभ जन्म दिन (अल्जीरियन भाशा)
  • मेवलीद-इ शरिफ़ – शुभ जन्म / मेवलूत – नाम (तुर्की भाशा)
  • मेवलूद/मेवलीद – शुभ जन्म (बोस्नियन)
  • मेवलैदी – शुभ जन्म (अल्बेनियन)
  • मीलाद-ए पयम्बर-ए अक्रम – महा/शुभ पैगंबर का जन्म (पर्शियन)
  • मूलूद – जन्म (जावनीस भाशा)
  • नबी/महानबी जयंती – महा प्रवक्ता का जन्म (संस्कृत / दक्षिण भारती भाशाएं).
  • यौम अन-नबी – प्रेशित का दिन (यौम) (अरबी)
  • मोवलूद - माहा प्रेशित का जन्म (अज़ेरी भाशा)

चित्र मालिका[संपादित करें]

  • ह.मुहम्मद का जन्म स्थल, मक्का, सऊदी अरब

  • मौलीद उत्सव, कैरो (ईजिप्ट) 1878

  • उस्मानिया ध्वज, लिबिया का शहर बेंघाज़ी 1896 में उत्सव

  • ईद मीलाद उत्सव, पारलमेंट हाउज़, पाकिस्तान

  • सेकेतन उत्सव (मीलाद), हफ़्ते भर का उत्सव, इंडोनेशिया

  • शेख सूफ़ी रियाज़ नख्शबन्दी असलमी, 2007 में मीलाद उत्सव

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कडियां[संपादित करें]

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Short Essay on 'Id-ul-Fitr' in Hindi | 'Eid' par Nibandh (301 Words)

Short Essay on 'Id-ul-Fitr' in Hindi | 'Eid' par Nibandh (301 Words)

ईद


'ईद-उल-फितर' या 'ईद' मुसलमानों के सबसे बड़े त्यौहारों में से एक है। यह त्यौहार दुनिया भर के मुसलमानों का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक त्यौहार है। यह त्यौहार भारत सहित पूरी दुनिया में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। ईद का त्यौहार रमजान के पवित्र महीने के बाद मनाया जाता है।

मुसलमानों के लिए रमजान के दिनों का बहुत महत्त्व है। इस दौरान वे दिन भर पूर्ण उपवास रखते हैं। पानी पीना भी वर्जित होता है। शाम को नमाज़ अदा कर ही भोजन ग्रहण करते हैं। रमजान के महीने के अंतिम दिन जब आकाश में चाँद दिखाई देता है तो उसके दूसरे दिन ईद मनाई जाती है।

ईद का त्यौहार मनाने की तैयारी पहले से ही आरम्भ कर दी जाती है। बच्चे, युवा, वृद्ध सभी उत्साहित दिखाई देते हैं। बाज़ारों में भीड़ बढ़ जाती है। अमीर-गरीब सभी नए वस्त्र, जूते-चप्पल, उपहार आदि खरीदने में व्यस्त हो जाते हैं।

ईद के दिन सुबह से ही बच्चे, युवा, वृद्ध सभी विशेष प्रकार के वस्त्र पहनकर, सर पर टोपी लगाकर ईदगाह में जमा होने लगते हैं। वहाँ सभी पंक्तिबद्ध होकर विशेष नमाज़ अदा करते हैं। देश की सभी प्रमुख मस्जिदों में भी ऐसा ही दृश्य देखा जा सकता है। सभी आपसी भेद-भाव भूलकर गले मिलते हैं और एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं।

ईद के दिन मुसलमानों के घर मीठी सेवईं बनती है। इसके अतिरिक्त अनेक प्रकार के व्यंजन भी तैयार किये जाते हैं। लोग अपने सगे सम्बन्धियों के घर जाकर उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं। रात में मस्जिदों पर रोशनी की जाती है।

ईद आपसी मिलन और भाई-चारे का त्यौहार है। यह त्यौहार भारत की बहुआयामी संस्कृति का प्रतीक है। इस त्यौहार पर भारत के सभी समुदायों के लोग बहुत खुश होते हैं। ईद का त्यौहार सभी के लिए खुशियाँ लेकर आता है। यह त्यौहार दया, परोपकार, उदारता, भाई-चारा आदि मानवीय भावनाओं से युक्त होता है।


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